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6 Comments

  1. Shabd
    May 1, 2018 @ 2:57 pm

    अरे बहुत बेहतरीन चीज़ सीखी आज, धन्यवाद आपका सर जी

  2. Dolly Parihar
    May 1, 2018 @ 6:11 pm

    कुछ नया पढ़ा। बहुत सुन्दर जानकारी। ☺?

  3. अंकित
    May 2, 2018 @ 5:09 am

    इस पोस्ट पर कोई “लव रियेक्शन” का ऑप्शन नहीं है क्या??

  4. अनंत महेन्द्र
    May 2, 2018 @ 10:32 am

    तो ये था समेकित निष्कर्ष उन सभी पहली पंक्तियों का..बढ़िया विश्लेषण किया डॉक्टर साब ने..

  5. rsbharti
    May 2, 2018 @ 9:02 pm

    आजकल की कहानियाँ पढ़कर अक्सर निराश हो जाता हूँ, क्योंकि कई नये लेखक कहानियों की फ़िज़ा ही नहीं गढ़ पाते हैं, जिससे कहानी को बीच में ही छोड़ना पड़ता है. कई उपन्यासों के साथ भी ऐसा ही हुआ है.

  6. राजीव रोशन
    September 6, 2018 @ 5:04 pm

    बेहतरीन लिखा प्रवीण जी। फिक्शन और नॉन-फिक्शन दोनों को इस लेख में कवर कर गए। आपका लिखा हमेशा ही पठनीय होता है।

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